"अरे कोई इसके मुँह में निप्पल (पैसिफ़ायअर) दो!" अब सभी ओर से यही आवाज़ सुनाई दे रही है। पूरी दुनिया अब एक तरह से ट्रम्प महाशय की अगली टिप्पणी या सोशल मीडिया अकाउंट पर अगली घोषणा का इंतज़ार करती दिखाई देती है। एक समय था जब देश विदेश के सामरिक विषयों पर बक़ायदा कैबिनेट में चर्चा होती थी फिर प्रेस काँफ़्रेंस में पत्रकारों को आधिकारिक विज्ञप्ति दी जाती थी, अब यह सब ट्रम्प महोदय के मूड पर ज़्यादा निर्भर है, ट्रूथ सोशल पर आप अन्दाज़ लगा सकते हैं कि आज दुनिया में क्या होने वाला है। वैसे तो सोशल मीडिया में अपने अकाउंट में कुछ भी पोस्ट करने के किए स्वतंत्र हैं यह महाशय, पर, इनका अन्दाज़-ए-बयां ही कुछ और है ( ग़ालिब से माफ़ी चाहूँगा)।
एक और ग़ज़ल याद आ रही है, जगजीत सिंह चित्रा सिंह की, "दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है", डॉनल्ड ट्रम्प ने तो इस दुनिया को सच में मिट्टी का खिलौना ही मन लिया है, और इसीलिए उन्हें इसके टूट जाने की कोई चिंता फ़िक्र नहीं है । बचपन से आज तक, वे अलग अलग प्रकार के खिलौनों से खेलने के आदी जो हैं, ऐसे बिगड़ैल बच्चों से निजात पाने के लिए उनके माता पिता उन्हें खिलौनों में ही तो उलझा दिया करते थे। उन्हें क्या पता था, कि एक दिन उनके साहबजादे पूरी दुनिया को ही खिलौना समझ बैठेंगे। वैसे ही अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कहा था "यह ग्लोबल वॉर्मिंग वग़ैरह सब मनगढ़ंत बकवास है", मिट्टी की दुनिया को इस गरमी से भला क्या नुक़सान होगा ।
बच्चों की एक और आदत होती है, वह है ख़याली पुलाव बनाने की और उसे बड़ी ही गर्मजोशी के साथ सभी को परोसने की, महामहिम ट्रम्प महाशय की तो इस में महारत ही हासिल है, कभी ईरान की परमाणु क्षमता को वे नेस्तनाबूद करते नज़र आते हैं तो कभी होर्मुज जलडमरुमध्य को खोलते नज़र आते हैं तो कभी बंद, कभी ईरान के शीर्ष मौलनाओं को मिटाते और कभी उनही से संधि वार्ता करते । कभी नाटो को धमकी देते हुए, कभी उन्हें मदद के लिए पुकारते हुए, रूस यूक्रेन के बीच शांति कराते कराते अब रूस से ही ईरान युद्ध में मध्यस्थता करने के लिए उन्हें ही आमंत्रित करने लगते हैं । कभी मोदी सच्चे मित्र बन जाते हैं तो कभी उसी मित्र के राष्ट्र पर टैरिफ़ का कमरतोड़ वज़न दल देते हैं।बच्चे भी तो चंचल होते हैं,उनका मन कभी इधर तो कभी उधर भागते नज़र आता हैं, एक जगह टिक ही नहीं सकता है।अब तो कभी वेनेज़ुएला तो कभी ईरान , कभी ग्रीनलैंड तो कभी क्यूबा सभी पर उनकी नज़र है, वहाँ भी
तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़ मिट्टी के लिए ही तो जा रहे हैं, वे जानते हैं कि शरीर नश्वर है, आख़िर मिट्टी में ही तो मिलना है उसे, बाइबल में भी तो लिखा है,"dust to dust"।बच्चों को बहलाने के लिए दूसरी वस्तु जिसका इस्तेमाल किया जाता है, वो है निप्पल, एक पैसिफ़ायअर, बच्चे उस में इतने मगन हो जाते हैं की रोना धोना भूल जाते हैं, और अक्सर थोड़ी देर में सो जाते हैं। अभी तो दुनिया वाले भी इसी फ़िराक़ में हैं कि कौन इसे पैसिफ़ायअर देगा, ताकि यह स्वयं भी थोड़ा चुप रहे, और सो जाए ताकि दुनिया फिर अपनी पटरी पर लौट सके।
सटीक व्याख्यान।
ReplyDeleteबच्चों को बहलाने के लिए उन्हें झुनझुना भी दिया जाता है जिसे बजाकर वे खुश हो जाते हैं। ट्रंप साहब वही कर रहे हैं ।अंग्रेजी एवं हिंदी भाषाओं में आप को समान दक्षता प्राप्त है। हिंदी में भी लिखा करें।
ReplyDeleteअत्यंत रोचक विवरण। श्रीमान ट्रम्प ने पूरे विश्व में उथल पुथल मचा रखी है। आज ही एक पत्रकार से साक्षात्कार के बीच से उठ कर चले जाना उनकी असंतुलित मनःस्थिति दर्शाता है। नितांत आवश्यक है कि ट्रंप को अतिशीघ्र ही पैसीफायर दिया जाए।
ReplyDeleteसराहनीय लेख।